केसरिया हिंदू वाहिनी ने राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा से समर्थन वापस लिया, संगठन ने बताई वजहें
लखनऊ, 22 सितंबर 2026
यूजीसी के मुद्दे को लेकर पिछले कुछ समय से राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के साथ संवाद एवं सहयोग कर रहे केसरिया हिंदू वाहिनी ने अब राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा से अपना समर्थन वापस लेने की घोषणा की है। संगठन की ओर से 21 सितंबर 2026 को जारी आधिकारिक सूचना में समर्थन वापसी के पीछे कई संगठनात्मक, प्रशासनिक और वित्तीय कारणों का उल्लेख किया गया है।
राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा द्वारा हाल के दिनों में यूजीसी से जुड़े मुद्दों को लेकर विभिन्न जिलों में प्रदर्शन और ज्ञापन कार्यक्रम किए गए हैं। वाराणसी, झांसी, इटावा और देवरिया सहित कई स्थानों पर मोर्चे के कार्यक्रमों की खबरें सामने आई हैं।
संगठन ने बताए ये प्रमुख कारण
केसरिया हिंदू वाहिनी की आधिकारिक सूचना के अनुसार, संगठन राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के साथ यूजीसी के मुद्दे पर संवाद और सहयोग कर रहा था तथा एक नए राजनीतिक विकल्प की संभावनाओं पर भी विचार कर रहा था। हालांकि, वर्तमान परिस्थितियों और संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा के बाद समर्थन वापस लेने का निर्णय लिया गया।
पत्र में मुख्य रूप से निम्न बिंदु उठाए गए हैं—
- राजनीतिक दिशा को लेकर असमंजस
केसरिया हिंदू वाहिनी का कहना है कि राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा आगे किस राजनीतिक दिशा और उद्देश्य के लिए कार्य करेगा, यह स्पष्ट नहीं है। - पार्टी के पंजीकरण को लेकर सवाल
पत्र में संगठन ने राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के अभी तक पंजीकृत राजनीतिक दल के रूप में स्थापित नहीं होने का उल्लेख करते हुए उसके वर्तमान स्वरूप और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। - संगठनात्मक अनुशासन पर आपत्ति
केसरिया हिंदू वाहिनी ने अपने पत्र में पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के बीच अनुशासन और नियुक्तियों/निष्कासन की प्रक्रिया को लेकर असहमति व्यक्त की है। - यूजीसी रोलबैक आंदोलन के आधार पर सवाल
पत्र में कहा गया है कि यूजीसी रोलबैक के मुद्दे पर संगठन की गतिविधियों का पर्याप्त ठोस आधार स्पष्ट नहीं है। साथ ही, पत्र में कार्यकर्ताओं से कथित रूप से आर्थिक सहयोग मांगे जाने की शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है। - आर्थिक सहयोग को लेकर संगठन की आपत्ति
केसरिया हिंदू वाहिनी का कहना है कि वह अपने कार्यकर्ताओं को ऐसी स्थिति में नहीं रख सकती, जहां उनसे आर्थिक मदद की अपेक्षा की जाए, जबकि संगठन के अनुसार संबंधित गतिविधियों में आर्थिक पारदर्शिता को लेकर सवाल बने हुए हैं। - वित्तीय अनियमितताओं के आरोप
आधिकारिक पत्र में राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा से जुड़ी कुछ कथित वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। हालांकि, ये केसरिया हिंदू वाहिनी द्वारा लगाए गए आरोप/आपत्तियां हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि इस समाचार में नहीं की गई है। - पार्टी के पंजीकरण से पहले चंदा/रसीद को लेकर आपत्ति
पत्र में आरोप लगाया गया है कि संगठन के पंजीकरण की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के बावजूद होटल एवं अन्य खर्चों के लिए जिला या प्रदेश पदाधिकारियों से आर्थिक सहयोग मांगा गया तथा चंदे की रसीद काटने की बात कही गई। केसरिया हिंदू वाहिनी ने इसे अनुचित बताया है। - राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की शैली पर असहमति
पत्र में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा द्वारा किसी पदाधिकारी द्वारा असहमति व्यक्त किए जाने पर उस पर राजनीतिक दल का एजेंट होने जैसे आरोप लगाए जाने की शैली से केसरिया हिंदू वाहिनी सहमत नहीं है।
“गहन विचार-विमर्श के बाद लिया निर्णय”
केसरिया हिंदू वाहिनी ने अपनी आधिकारिक सूचना में कहा है कि समर्थन वापसी का निर्णय गहन विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। संगठन ने स्पष्ट किया कि वह अब राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के साथ अपने पूर्व समर्थन एवं संबंध को समाप्त करते हुए समर्थन वापसी की घोषणा करता है।
केसरिया हिंदू वाहिनी की ओर से जारी पत्र पर संगठन के संस्थापक डॉ. अतुल कुमार मिश्रा के हस्ताक्षर हैं।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा ने फरवरी 2026 में अपनी राजनीतिक पार्टी की घोषणा की थी और इसके बाद यूजीसी से जुड़े मुद्दों को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में कार्यक्रम आयोजित किए हैं।





